भारत में तर्क और प्रयोग के प्रति नजरिया .
भारत वर्ष में ज्ञान के भंडार और उनके द्रष्टा ऋषियो के प्रत्ये पवित्र भाव रहा है.
इस बाबत में एक भौतिक वादी विचार्कने कहा की " त्रयोवेदास्य कर्तारः भान्दर्तुनिशाचारा:"
मतलब तीनो वेदों को बनाने वाले पाखंडी और निशारो है. एसा विक्रू वक्तव्य देने वाले के साथ
कोई भी दुर्व्यवहार नहीं हुआ . इतनाही नहीं बल्कि ये उनका स्वतंत्र सोच है एसा स्वीकार करके
उन्हें दर्शनकार का स्थान मिला.
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